अप्सरा साधना पूर्ण सत्य



स्वर्ग की सुन्दर अप्सराओं से मिलना चाहते है तो करे आज ही निम्न लिखित उपाए

 अप्सरा को सिद्ध करना भी बहुत आसान है | 

 

अप्सरा का अर्थ होता है कि सोलह वर्ष की चिर यौवन वती और वो निरंतर आपके सामने प्रत्यक्ष हो | 

 

और निरंतर जो भी आप उसे आज्ञा देंगे वो उस आज्ञा का भी पालन करेगी, सिर्फ पांच वर्षों तक | 

 

उसके बाद में इस मंत्र को वापिस सिद्ध करना पड़ेगा |अप्सरा को बुलाने के लिए 1 माला मंत्र जाप करने की जरूरत है |

  • कोई भी वस्त्र डाल कर अप्सरा साधना कर सकते हैं | जरूरी नहीं है कि आप धोती और कुर्ता ही पहने |
  • अप्सरा साधना में आप किसी भी प्रकार के वस्त्र पहन सकते हैं | वस्त्र शुध्द और दिव्य हों |पहनें हुए वस्त्र दुबारा नहीं पहन सकते |
  • गुलाब के पुष्प सामने रखेंगे | 101 पुष्प |
  • यह रात्रि कालीन 11 बजे की  साधना  है |
  • कमरे में दूसरे का प्रवेश वर्जित है |
  • यह साधना रेगुलर  है |  यह 11 दिन की साधना है और 11 माला मंत्र जप करना है |
  • यह स्फटिक माला से और कर माला से  मंत्र का जाप करना है और अगर माला से करना है तो माला को गले में धारण किए रहेंगे |
  • आप जो भी चाहें भोजन कर सकते हैं | मीट और मांस नहीं करेंगे |
  • रात्रि का मतलब है 10:30 बजे से 5 बजे तक |
  • शुक्रवार को प्रारंभ करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा | 
  • और ये आपको 11 माला करनी है |
  • और 11 दिनों तक या 21 दिनों तक  करनी है |
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  • इस बीच में आपको आवाजें आ सकती है | आप इस मंत्र का दुरूपयोग नहीं करेंगे | 
  • इस साधना को दूसरों को बताने की आवश्यकता नहीं है | गुरु के अलावा किसी को नहीं बता सकते हैं |
  • कई बार 11 दिन में सफलता नहीं मिलती है तो 15 दिन तक करना पड़ेगा |
  • गुलाब का इत्र अपने वस्त्रों पर या कानों पर लगा होना चाहिए | 
  • और पूरी क्षमता के साथ इस मंत्र को जो में बोल रहा हूँ शक्तिपात रूप से इसको ग्रहण करेंगे |
  •  चाहे तो गुलाब की माला पहन  लें | इसमें किसी भी प्रकार के वस्त्र पहन  सकते हैं | 
  • और रेगुलर करनी है शुक्रवार से प्रारंभ करनी है और रात्रि को करनी है | 
  • और कई गृहस्थ साधकों ने अप्सरा को  सिद्ध किया है | 
  • यह गोपनीय है तो आप तक ही सीमित रहेगी ये बात | इसको आप उजागर नहीं कर पायंगे |
  • ज्यों ही आपने उजागर किया साधना आपकी निष्फल हो जाएगी  | समाप्त हो जाएगी| 
  • यह एकत्व साधना है | यह एक शक्तिपात मंत्र है |


” ॐ रं क्षं रंभे आगच्छ आगच्छ क्षं रं ॐ नमः “




हाथ में जल लेकर पहले संकल्प ले और फिर मंत्र जप शुरू करें | इस साधना में मंत्र जप की कोई सीमा नहीं है | इसलिए अपने सामर्थ्य अनुसार प्रतिदिन समान मात्रा में मंत्र जप करें | मंत्र जप के लिए स्फटिक की माला का प्रयोग करें | इस प्रकार सात दिनों तक इस कार्य को करने से अप्सरा प्रत्यक्ष रूप से जातक के सामने प्रकट होती है | उस समय जातक को अप्सरा के गले में गुलाब के फूलों की माला पहनाकर उसे अपने साथ रहने का वचन ले लेना चाहिए |


अप्सरा साधना शुरू करने से पहले ध्यान दे, आप जिस रूप में अप्सरा की आराधना करते है वह उसी रूप में आपको दर्शन देती है | अप्सरा साधना माँ रूप में, बहन के रूप में या पत्नी के रूप में की जा सकती है |

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